सूचना विंग के बारे में

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सूचना स्कन्ध को विभिन्न मीडिया यूनिटों के माध्यम से सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के सूचना के प्रसार, शिक्षा और संचार का दायित्व सौंपा गया है। यह स्कन्ध भारतीय सूचना सेवा संवर्ग प्रबंधन के साथ नीति निर्माण और प्रशासन, नीति नियोजन और मंत्रालय की विभिन्न मीडिया यूनिटों और स्वायत्त संस्थानों के साथ समन्वय भी करता है। सूचना विंग संचार के विभिन्न माध्यमों के माध्यम से सरकार की प्रमुख नीतिगत पहलों पर सूचना के प्रसार और बेहतर लोक संपर्क और प्रभाव के लिए विभिन्न मीडिया अभियानों को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रिंट मीडिया के विकास को सुधार बनाने और इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतियां भी तैयार करता है। सूचना स्कन्ध का यह प्रयास मंत्रालय के अधीन निम्नलिखित मीडिया इकाइयों की सहायता से पूरा किया जाता है:

लोक संपर्क और संचार ब्यूरो

लोक संपर्क और संचार ब्यूरो (बीओसी) को मंत्रालय द्वारा विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी), फील्ड प्रचार निदेशालय (डीएफपी) और गीत और नाटक प्रभाग (एस एंड डीडी) की पूर्ववर्ती मीडिया इकाइयों को मिलाकर 08.12.2017 को बनाया गया था। ताकि इन संगठनों के बीच तालमेल हो और ये मिलकर कार्य करें; संसाधनों और कार्यबल का बेहतर उपयोग हो; और प्रत्येक राज्य और प्रत्येक जिले में आम जनता के साथ बेहतर संचार हो। मुख्यालय में बीओसी का प्रमुख महानिदेशक स्तर का अधिकारी है और इसके 23 क्षेत्रीय लोक संपर्क ब्यूरो (आरओबी) और 148 फील्ड संपर्क ब्यूरो (एफओबी) हैं। बीओसी नाटक, नृत्य-नाटक, सामासिक कार्यक्रम, कठपुतली कला, बैलेट्स, ओपेरा जैसी विविध मंच कलाओं तथा अन्य लोक और पारंपरिक गायन, पौराणिक गायन और अन्य स्थानीय लोक और पारंपरिक रूप का उपयोग करते हुए, लाइव मीडिया के माध्यम से मुख्यालय स्तर पर मंत्रालय/विभागों और सरकारी संगठनों की संचार आवश्यकताओं और क्षेत्रीय और फील्ड स्तर पर पारस्परिक संचार का कार्य करता है और इस प्रकार सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रचार करता है। युवा कार्यक्रम और खेल; और सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने 12 अगस्त, 2018 को जवाहर कला केंद्र, जयपुर में क्षेत्रीय लोक संपर्क ब्यूरो द्वारा आयोजित फोटो प्रदर्शनी "साफ नियत सही विकास" का अवलोक करते हुए। लोक संपर्क और संचार ब्यूरो प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया, आउटडोर प्रचार, लाइव मंच प्रस्तुतियों और कलाओं आदि के माध्यम से भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए मल्टी-मीडिया विज्ञापन और प्रचार करता है। लोक संपर्क और संचार ब्यूरो एक सेवा एजेंसी के रूप में कार्य करता है और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की ओर से जमीनी स्तर पर संचार करता है। वेबसाइट : लोक संपर्क और संचार ब्यूरो

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी केंद्र

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी केन्द्र (ईएमएमसी) को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता के किसी भी उल्लंघन के लिए अनुमत्य उपग्रह टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित की जा रही सामग्री की निगरानी का कार्य सौंपा गया है। ईएमएमसी प्रसारण सामग्री की निगरानी करने, उसका रिकॉर्ड रखने और विश्लेषण करने के लिए उन्नत तकनीकों से सज्जित एक प्रमुख व्यवस्था है। ईएमएमसी के पास भारतीय भू-भाग में प्रसारित होने वाले 900 चैनलों की सामग्री को स्टोर करने और पुर्नप्राप्त करने की तकनीकी सुविधा है, ताकि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत बनाई गई संहिताओं के किसी भी उल्लंघन की जांच की जा सके, जिनका पालन सभी प्रसारण संस्थाओं को करना है। भारत में प्रसारित चैनलों के लिए संशोधित अप-लिंकिंग दिशानिर्देश और डाउन-लिंकिंग दिशानिर्देशों में संभावित उल्लंघनों के लिए सामग्री की निगरानी करने और उसके उपचारात्मक उपाय करना भी अपेक्षित है। ईएमएमसी, जांच समिति के लिए रिकॉर्ड किए गए क्लिप देने के साथ-साथ स्पष्ट उल्लंघनों पर समक्ष रिपोर्ट तैयार करती है, जो कथित उल्लंघनों की जांच करती है और अपने निष्कर्षों को आगे की कार्रवाई के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति और अन्य निकायों को अग्रेषित करती है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी केंद्र अत्यंत सार्वजनिक महत्व के सामयिक मामलों की भी पहचान करता है और उन्हें मूल्यांकन के लिए और यदि आवश्यक हो, तो कोई भी कार्रवाई करने के लिए मंत्रालय को रिपोर्ट करता है। ईएमएमसी सरकार द्वारा वांछित मामलों के मीडिया कवरेज पर विशेष रिपोर्ट भी तैयार करता है और उसे मंत्रालय को प्रस्तुत करता है। वर्ष 2018-19 में 150 डीटीएच प्लेटफॉर्म चैनलों के लिए निगरानी सुविधा स्थापित की जाएगी और इस पर काम प्रगति पर है।

भारतीय जन संचार संस्थान

सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का XXI) के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), 17 अगस्त, 1965 को अस्तित्व में आया। संस्थान की स्थापना शिक्षण, प्रशिक्षण और पत्रकारिता, मीडिया और जन संचार के क्षेत्रों में अनुसंधान करने के मूल उद्देश्य के साथ की गई थी। पिछले 52 वर्षों में, संस्थान ने आधुनिक समय में तेजी से बढ़ते और बदलते मीडिया उद्योग की विविध और तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई विशेषज्ञ पाठ्यक्रमों का संचालन करने में विशेषता हासिल की है। आज की स्थिति के अनुसार, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के अलावा, संस्थान प्रिंट पत्रकारिता (अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, उड़िया, मराठी और मलयालम), रेडियो और टीवी पत्रकारिता और विज्ञापन और लोक संपर्क में कई स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है। संस्थान एशियाई, अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और पूर्वी यूरोपीय देशों के मध्यम स्तर के कार्यरत पत्रकारों के लिए विकास पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित करता है, जो 1969 से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रायोजित है, और वर्तमान में आईटीईसी कोलंबो योजना योजनाओं के एससीएएपी और टीसीएस के तहत है। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र में संगठनों के विभिन्न मीडिया, प्रचार और प्रचालन संगठनों में काम कर रहे संचार पेशेवरों की निरंतर बढ़ती प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक सप्ताह से चार सप्ताह तक के कई विशेषज्ञ अल्पकालिक पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संस्थान विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशालाएं आदि आयोजित करने और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं चलाने में भी सहयोग करता है। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के 07 दिसंबर, 2018 को नई दिल्ली में 51वें दीक्षांत समारोह में लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन और सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, श्री अमित खरे और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। हाल के दिनों में, जनसंचार में अमूलचूल बदलाव आया है और यह कार्यकलाप के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया बहुत प्रभावित हुई है। इसने तेजी से महत्व और प्रमुखता हासिल की है और विभिन्न शैक्षणिक विषयों में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है। दुनिया भर में आई सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने जनसंचार माध्यमों के विस्तार और इसके बदलते स्वरूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तदनुसार, संस्थान अपने पाठ्यक्रम पाठ्यचर्या का लगातार मूल्यांकन करता है और उनमें संशोधन करता है ताकि तेजी से बदलते परिवेश से उत्पन्न समकालीन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। इससे बदले हुए परिदृश्य में भी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की प्रभावशीलता को बनाए रखने में सहायता मिलती है। अपनी स्थापना के पचास वर्षों में अपनी निरंतर कड़ी मेहनत के माध्यम से और अपने उत्कृष्ट वितरण तंत्र के परिणामस्वरूप, संस्थान ने संचार शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में "उत्कृष्टता केंद्र" की प्रेरणादायक प्रतिष्ठा को लगातार बनाए रखा है। इसने विभिन्न सर्वेक्षणों में देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में लगातार रैंक बनाए रखा है। वेबसाइट : भारतीय जन संचार संस्थान

न्यू मीडिया विंग

1945 में स्थापित, अनुसंधान, संदर्भ और प्रशिक्षण प्रभाग, जिसका अब नया नाम "न्यू मीडिया विंग" है, जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए एक सूचना सेवा एजेंसी के रूप में कार्य करता है। यह प्रभावी संचार के लिए मीडिया नीतियों, कार्यनीतियों और अभियानों की योजना बनाने के लिए मंत्रालय और इसकी मीडिया यूनिटों को उच्च गुणवत्ता वाली अनुसंधान और संदर्भ सेवाएं प्रदान करता है। यह विंग मंत्रालय के सोशल मीडिया सेल को कार्यात्मक और प्रचालन सहायता भी प्रदान करता है। इंडिया-ए रेफरेंस ऐनुअल यह प्रभाग केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, संघ राज्य क्षेत्रो प्रशासनों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/स्वायत्त निकायों द्वारा किए गए विकास और प्रगति पर एक संदर्भ पुस्तक, 'इंडिया-ए रेफरेंस ऐनुअल' संकलित करता है। इसे एक साथ हिंदी में 'भारत' शीर्षक से प्रकाशित किया जाता है। वेबसाइट : न्यू मीडिया विंग

भारतीय प्रेस परिषद

भारतीय प्रेस परिषद एक सांविधिक अर्ध-न्यायिक स्वायत्त प्राधिकरण है जिसे संसद द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता को बनाये रखने और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने और उनमें सुधार करने के दोहरे उद्देश्य का दायित्व सौंपा गया है। प्राधिकारियों और प्रेस के लोगों पर अर्ध-न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करता है। इसमें एक अध्यक्ष और 28 सदस्य होते हैं। जबकि अध्यक्ष, परंपरा के अनुसार, भारत के उच्चतम न्यायालय का वर्तमान/सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है, 28 सदस्यों में से 20 सदस्य प्रेस के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और पाठकों के हितों की देखरेख करने वाले आठ सदस्य संसद के दोनों सदनों (3 लोकसभा और 2 राज्य सभा) और देश के प्रमुख साहित्यिक और कानूनी निकायों अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि होते हैं। अधिनियम के तहत परिषद के कार्यों के निष्पादन के लिए इसकी अपनी निधियां हैं जिनमें इसके द्वारा समाचार पत्रों से प्राप्त शुल्क, अन्य प्राप्तियां और केंद्र सरकार से सहायता अनुदान शामिल हैं। वेबसाइट : भारतीय प्रेस परिषद

पत्र सूचना कार्यालय

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों, पहलों और उपलब्धियों के संबंध में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर सूचना प्रसारित करने के लिए भारत सरकार की नोडल एजेंसी है। यह सरकार और मीडिया के बीच एक माध्यम के रूप में कार्य करता है और मीडिया में आई लोगों की प्रतिक्रिया पर सरकार को फीडबैक भी प्रदान करता है। पीआईबी के महत्वपूर्ण कार्य हैं: - i. भारतीय और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों की मान्यता देना, ii. प्रेस वार्ता और प्रेस कॉन्फ्रेंस करना, iii. प्रेस और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर सरकार को फीडबैक देना, iv. विकास परियोजनाओं के लिए प्रेस दौरों का आयोजन, v. जन सूचना अभियान (पीआईएस) का आयोजन। प्रधान महानिदेशक (एम एंड सी), प्रेस सूचना ब्यूरो, श्री सीतांशु आर. कर सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर, 2018 को नई दिल्ली में पीआईबी के अधिकारियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाते हुए। पीआईबी के तहत फोटो प्रभाग को भारत सरकार के विभिन्न कार्यकालापों के फोटो कवरेज के माध्यम से दृश्य सहायता प्रदान करने का दायित्व दिया गया है। अक्टूबर 1959 में स्थापित, यह प्रभाग शायद देश का एकमात्र ऐसा संगठन है जिसके पास स्वतंत्रता-पूर्व युग से लेकर आज तक के डिजिटल रूप में संरक्षित लगभग 10 लाख से अधिक नेगेटिव/ पारदर्शी चित्रों का समृद्ध भंडार है। इस प्रकार फोटो डिवीजन स्टिल फोटोग्राफ के निर्माण और भंडारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व के हैं। पीआईबी के तहत फोटो प्रभाग को भारत सरकार के विभिन्न कार्यकालापों के फोटो कवरेज के माध्यम से दृश्य सहायता प्रदान करने का दायित्व दिया गया है। अक्टूबर 1959 में स्थापित, यह प्रभाग शायद देश का एकमात्र ऐसा संगठन है जिसके पास स्वतंत्रता-पूर्व युग से लेकर आज तक के डिजिटल रूप में संरक्षित लगभग 10 लाख से अधिक नेगेटिव/ पारदर्शी चित्रों का समृद्ध भंडार है। इस प्रकार फोटो डिवीजन स्टिल फोटोग्राफ के निर्माण और भंडारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व के हैं। http://photodivision.gov.in गोवा की माननीय राज्यपाल, श्रीमती मृदुला सिन्हा गोवा में 49वें आईएफएफआई 2018 के उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए जिनके साथ माननीय युवा मामले और खेल और सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर और सचिव (सूचना और प्रसारण) श्री अमित खरे उपस्थित हैं। - सौजन्य फोटो डिवीजन पीआईबी सरकार और मीडिया के बीच एक माध्यम के रूप में कार्य करता है, मीडिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त संचार कार्यनीतियों पर सरकार को सलाह देता है और सरकार को सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में मीडिया में आई जनता की धारणा से अवगत कराता है। वेबसाइट : पत्र सूचना कार्यालय

प्रकाशन विभाग

प्रकाशन विभाग राष्ट्रीय महत्व के मामलों और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर पुस्तकों का अदभूत भंडार है। यह कला, इतिहास, संस्कृति, प्रतिष्ठित लोगों की जीवनी, वनस्पतियों और जीवों और विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर पुस्तकें, जर्नल, वार्षिक, पत्रिकाएं और सीडी प्रकाशित करता है। प्रकाशन विभाग सूचना – मनोरंजन, भूमि, लोगों, विरासत, संस्कृति और समाज के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से राष्ट्रपतियों/प्रधानमंत्रियों के अभिभाषण, बाल साहित्य - कथा और गैर-कथा सामग्री के व्यापक उद्देश्य के साथ, जिसका लक्ष्य बच्चों में मानव मूल्यों और वैज्ञानिक रूझान पैदा करना है। माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू 8 दिसंबर, 2018 को प्रकाशन विभाग, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित माननीय राष्ट्रपति के चुनिंदा भाषणों के साथ - द रिपब्लिकन एथिक, और लोकतंत्र के स्वर का विमोचन करते हुए। अन्य प्रमुख प्रकाशनों में आजकल (हिंदी और उर्दू), बाल भारती (हिंदी), कुरुक्षेत्र (अंग्रेजी और हिंदी), योजना (अंग्रेजी, हिंदी और 11 अन्य भाषाएं), "एम्प्लायमेंट न्यूज" / रोजगार समाचार शामिल हैं। वेबसाइट : प्रकाशन विभाग

भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक

भारत के समाचार पत्रों का पंजीयक का कार्यालय एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना समाचार पत्रों/पत्रिकाओं के पंजीकरण, पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने और समाचार पत्रों के वितरण दावों के सत्यापन के लिए प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 के तहत की गई है। आरएनआई के मुख्य वैधानिक कार्यों में देशभर में प्रकाशित समाचार पत्रों और प्रकाशनों का रजिस्टर रखना, समाचार पत्रों और प्रकाशनों को पंजीकरण का प्रमाण पत्र जारी करना, संबंधित डीएम को नए समाचार पत्रों के शीर्षक के अनुमोदन के बारे में सूचित करना और समाचार पत्रों और प्रकाशनों के प्रकाशकों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक विवरणों की जांच और विश्लेषण करना शामिल है। समाचार पत्रों और प्रकाशनों की आरएनआई प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय को 'प्रेस इन इंडिया' नाम से देश में प्रिंट मीडिया परिदृश्य पर एक वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करता है। आरएनआई इसमें पंजीकृत वास्तविक उपयोगकर्ताओं को न्यूजप्रिंट के आयात के लिए स्व-घोषणा प्रमाण पत्र को अभिप्रमाणित करता है और साथ ही प्रिंटिंग मशीनरी के आयात के लिए अनिवार्यता प्रमाण-पत्र प्रदान करता है। इन कार्यों के अलावा, यह कार्यालय डीएवीपी विज्ञापनों के उद्देश्य से पंजीकृत प्रकाशनों के विवरण का सत्यापन भी करता है। वेबसाइट : भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक
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